मैंने 24 घंटे मौन रखा… और मेरे अंदर ये बदलाव हुआ
मैंने 24 घंटे मौन रखा… और मेरे अंदर ये बदलाव हुआ
मौन व्रत के फायदे
🔴मौन व्रत के लिए पहले से तैयारी
मौन व्रत की तैयारी मैंने एक दिन
पहले ही शुरू कर दी थी।
घर के सभी working staff को
पहले से बता दिया था कि अगले दिन मुझे बोलना नहीं है,
इसलिए क्या करना है और क्या नहीं—सब स्पष्ट कर दिया।
मौन व्रत के दिन रोज़मर्रा के सभी काम
बहुत ही smoothly चलते रहे।
मैं पूरी तरह मौन में थी, फिर भी व्यवस्थाओं में
कहीं कोई बाधा नहीं आई।
🔴सुबह मैं मंदिर गई। रास्ते में किसी ने नमस्ते किया,
किसी ने “राधे-राधे” कहा।
मैं अपने साथ एक कागज़ ले गई थी,
जिस पर लिखा था— “मेरा मौन व्रत है”।
उसी कागज़ को दिखाकर मैंने सबको उत्तर दिया।
मंदिर में कुछ महिलाएँ मिलीं,
उन्हें भी वही कागज़ दिखाकर अपने मौन व्रत की जानकारी दी।
सभी ने बहुत सहजता और सम्मान के साथ सहयोग किया।
इस तरह सबके सहयोग से मेरा मौन व्रत शांतिपूर्वक और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
🔴निज अनुभव
मौन व्रत रखने के दौरान
अपने निज अनुभव बताती हूं
24 घंटे का यह मौन व्रत
मेरे लिए कोई कठिन तपस्या नहीं था,
यह स्वयं से मिलने का समय था।
मन भाग रहा था …विचार आ रहे थे, जा रहे थे।
लेकिन असीम शांति थी।
उसी के साथ यह भी स्पष्ट हुआ कि
मन को जीतना नहीं होता,
मन को समझना होता है।
मौन में मैंने जाना
कि शब्द कम हों तो
आत्मा ज़्यादा साफ़ सुनाई देती है।
आज मैं यह नहीं कहूँगी
कि मेरा मन पूरी तरह वश में हो गया,
लेकिन इतना ज़रूर कहूँगी—
अब मन मुझे नहीं चलाता,
अब मैं मन को देख पाती हूँ।
और यही
मेरी सबसे बड़ी हीलिंग है।”
🩸“अगर ये लेख आपके मन को शांति दे, तो इसे किसी एक ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इसकी ज़रूरत हो।”🩸
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