कभी-कभी चुप रहना भी एक जवाब होता है. समझो... जज मत करो

 Title: कभी-कभी चुप रहना भी एक जवाब होता है

कभी-कभी...

चुप रहना भी... एक जवाब होता है।

कभी कोई हमें टेक्स्ट का जवाब नहीं देता,

तो हम सोच लेते हैं —

शायद अब उसे फर्क नहीं पड़ता।

लेकिन ज़रूरी नहीं... हर बार यही वजह हो।

हो सकता है —

वो किसी परेशानी में फंसा हो,

दिल से बहुत उदास हो,

या बस... खुद को संभालने में लगा हो।

कभी-कभी,

चुप रहना भी एक जवाब होता है —

जो शब्दों से कहीं ज़्यादा गहरा होता है।

इसलिए...

जल्दी जज मत करो।

थोड़ा इंतज़ार करो।

शायद वो सिर्फ़ समय मांग रहा हो, दूरी नहीं।

क्योंकि जब हम किसी से दिल से जुड़े होते हैं,

तो समझना...

जवाब देने से भी ज़्यादा ज़रूरी होता है।

“समझो... जज मत करो।”

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