आंवला नवमी से देवउठनी ग्यारस तक-पुण्य और परंपरा का संगम(पार्ट-1) भगवान विष्णु 4 महीने क्यों सोते हैं?
आंवला नवमी से देवउठनी ग्यारस तक-पुण्य और परंपरा का संगम(पार्ट-1) भगवान विष्णु 4 महीने क्यों सोते हैं?
एक बार सभी देवता भगवान विष्णु से बोले —
हे प्रभु, जब वर्षा ऋतु आती है तो धरती पर सब कुछ गड़बड़ा जाता है।
बरसात, तूफ़ान, बाढ़ से मनुष्य और प्रकृति दोनों अस्थिर हो जाते हैं।
ऐसे समय में अगर आप कुछ समय योगनिद्रा में चले जाएं,
तो सृष्टि को थोड़ा विराम मिलेगा और व्यवस्था बनी रहेगी।”
तब gt भगवान विष्णु मुस्कराए और बोले —
“मैं चार महीने योगनिद्रा में रहूँगा,
ताकि सृष्टि को संतुलन और शांति मिले।
तब से आषाढ़ एकादशी को वे शयन करते हैं
और कार्तिक एकादशी (देवउठनी एकादशी) को जागते हैं।
यह हमें सिखाता है —
कभी-कभी रुकना, थमना और भीतर की शांति में जाना भी भक्ति है।
इस कहानी का संदेश:
हर चीज़ को संतुलन चाहिए —
जैसे दिन के बाद रात आती है, वैसे ही कर्म के बाद विश्राम ज़रूरी है।
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