दसवाँ दिन – अनंत चतुर्दशी (विदाई
दसवाँ दिन – अनंत चतुर्दशी (विदाई)
कथा – गणेश जी का विसर्जन
देवताओं ने शिव-पार्वती से प्रार्थना की कि गणेश जी को कुछ समय धरती पर भेजा जाए।
माता-पिता ने आशीर्वाद दिया—“लोग तुम्हें प्रेम से पूजेंगे, पर समय आने पर लौटना होगा।”
गणेश जी बोले—
“मेरा विसर्जन विदाई नहीं, बल्कि भक्तों के हृदय में स्थायी निवास होगा।”
धरती पर आकर उन्होंने सबके दुख दूर किए और घर-घर आनंद फैलाया।
फिर जब लौटने का समय आया, तो भक्त उदास हुए।
गणेश जी ने समझाया—
“मेरी मूर्ति तो जल में जाएगी, पर मैं सदा तुम्हारे विश्वास और प्रेम में रहूँगा।”
इसीलिए विसर्जन के समय भी भक्त खुशी से कहते हैं—
“गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!”
Comments
Post a Comment