कृष्ण पक्ष क्या है? पूर्णिया से अमावस्या के अवधि में ही श्राद्ध क्यों मनाते हैं?
🌙 कृष्ण पक्ष क्या है? पूर्णिया से अमावस्या के अवधि में ही श्राद्ध क्यों मनाते हैं?
🌙 कृष्ण पक्ष = अंधकार का समय
पूर्णिमा के बाद जैसे–जैसे चाँद घटता है, प्रकाश कम होता जाता है और अंधकार बढ़ता है।
अंतिम दिन अमावस्या को तो चाँद बिल्कुल ही लुप्त हो जाता है, और यह पूर्ण अंधकार का प्रतीक होता है।
इसका अंतिम दिन अमावस्या होता है, जब चाँद दिखाई नहीं देता।
इस दौरान चंद्रमा की शक्ति क्षीण होती है, इसलिए इसे “अंधकार पक्ष” भी कहा जाता है।
✨ विशेषताएँ
कृष्ण पक्ष में मन बाहरी जगत से हटकर भीतर की ओर जाता है।
यह समय आत्मचिंतन, साधना और पितरों के श्राद्ध के लिए सबसे उपयुक्त माना गया।
✨ श्राद्ध कृष्ण पक्ष में ही क्यों?
1अंधकार = भीतर की यात्रा
जब बाहर प्रकाश घटता है, तो मन स्वाभाविक रूप से भीतर की ओर मुड़ता है।
श्राद्ध का असली भाव है – आत्मचिंतन और स्मरण। इसलिए यह समय सर्वश्रेष्ठ माना गया।
अमावस्या और पितर
शास्त्रों में कहा गया है कि अमावस्या तिथि पितरों की तिथि होती है।
इस दिन पितर पृथ्वी लोक के करीब आते हैं और तर्पण–श्राद्ध से सहज तृप्त होते हैं।
🌼 पितरों और अंधकार का संबंध
अंधकार का अर्थ केवल रात या नकारात्मकता नहीं है।
इसका अर्थ है – गहराई, मौन, अंतरात्मा का स्पर्श।
जैसे बीज अंधेरे मिट्टी में अंकुरित होता है, वैसे ही श्रद्धा और कृतज्ञता की भावना अंधकार (कृष्ण पक्ष) में गहरी होती है।
इसीलिए पितृपक्ष को “अंधकार पक्ष” यानी कृष्ण पक्ष में मनाने की परंपरा बनी।
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