आज सावन का दूसरा सोमवार है और मैं दूसरा संकल्प लूंगी। मैंने एक गमले में जामुन के बीज डाले थे, 15 दिन बाद इसमें से पौधा निकल आया, इसी गमले में आज मैं मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाकर दूसरा सोमवार की पूजा की। और प्रार्थना की 🙏🏻 “हे मेरे परमात्मा! दूसरे सोमवार के इस पावन अवसर पर, मैं अपना संपूर्ण मन… बुद्धि… और संस्कार, आपके चरणों में समर्पित करती हूं। 🌸 मेरे विचारों में मधुरता हो… शब्दों में शीतलता… और कर्मों में शुभता ही हो। 🌿 पहले सोमवार को मैंने अपने कड़वे और तीखे संस्कार छोड़े। आज मैं संकल्प लेती हूं – हर परिस्थिति में… मैं शांत… करुणामयी… और स्नेहमयी रहूंगी। 🌺 यह घर केवल एक घर नहीं, यह एक पावन मंदिर है, जहां हर दीवार शिवमय है, हर कोना शांति और प्रेम से गूंजता है। 🍃 जामुन के पौधे के नीचे स्थित पार्थिव शिवलिंग के माध्यम से, मैं हर सांस में पावनता का अनुभव करूं। यह पवित्र ऊर्जा मेरे जीवन, मेरे घर और मेरे हर संबंध को दिव्यता से भर दे। सावन का दूसरा सोमवार
बसंत पंचमी पर मीठे पीले चावल का बहुत महत्व है मीठे पीले चावल बहुत आसान और स्वादिष्ट बनते हैं। नीचे घर पर बनने वाली सिंपल विधि बता रही हूँ 👉सामग्री बासमती चावल – 1 कप चीनी – ½ कप (स्वाद अनुसार) घी – 2 टेबलस्पून केसर – 8–10 धागे (या ¼ टीस्पून पीला या नारंगी फूड कलर) इलायची पाउडर – ½ टीस्पून लौंग – 2 काजू – 8–10 (कटे हुए) किशमिश – 1 टेबलस्पून पानी – 2 कप 👉बनाने की विधि चावल धोकर 20–30 मिनट भिगो दें। केसर को 2 टेबलस्पून गुनगुने दूध या पानी में भिगो दें। कढ़ाही या कुकर में घी गरम करें। इसमें लौंग, काजू और किशमिश डालकर हल्का भून लें। अब भीगे चावल डालकर 1 मिनट हल्के से चलाएँ। पानी डालें और उबाल आने दें। अब चीनी, केसर वाला पानी और इलायची पाउडर डालें। ढककर धीमी आँच पर चावल पकने दें (या कुकर में 1 सीटी)। चावल पक जाएँ तो हल्के हाथ से चला दें।
बसंत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व | ज्ञान और विद्या का पर्व 🩸बसंत पंचमी माँ सरस्वती की उपासना का पावन पर्व है। इस दिन ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है… 🩸 बसंत पंचमी भारत की एक अत्यंत शुभ और पावन तिथि है। यह दिन ऋतु परिवर्तन, ज्ञान की देवी माँ सरस्वती और जीवन में नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाने वाला यह पर्व, केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आत्मिक जागरण का संदेश देता है। 🩸 बसंत का आध्यात्मिक अर्थ🩸 बसंत ऋतु प्रकृति में नई चेतना का संचार करती है। पेड़ों पर नई कोपलें, खेतों में पीली सरसों और वातावरण में उत्साह—यह सब हमें सिखाता है कि 👉हर अंत के बाद एक नई शुरुआत निश्चित है। आध्यात्मिक दृष्टि से बसंत पंचमी यह संकेत देती है कि— जब मन में ज्ञान का प्रकाश आता है, तब जीवन की नीरसता समाप्त होकर आनंद खिल उठता है। 👉 माँ सरस्वती: ज्ञान और विवेक की देवी बसंत पंचमी को माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। माँ सरस्वती हमें केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि सही-गलत की पहचान शुद्ध विचार शांत और संतुलित मन का वरदान देती हैं। इस दिन पीले वस्...
ओम पितृ देवाय नमः
ReplyDelete