तीसरा दिन – विनम्रता (humility)

 तीसरा दिन – विनम्रता

"कुबेर जी ने बप्पा को दिखावे से भरपूर भोजन कराया, लेकिन गणेश जी सब खा गए। अंत में माँ पार्वती के दो चावल से ही तृप्त हुए। सीख ये है—दिखावा नहीं, सच्चाई और विनम्रता ही दिल भर देती है।"


"एक बार धन के देवता कुबेर ने अपनी ऐश्वर्य की शान दिखाने के लिए गणेश जी को भोजन पर बुलाया। गणेश जी खाते गए और कुबेर का पूरा भंडार खाली हो गया। आखिर में देवता कुबेर घबराकर माँ पार्वती के पास पहुँचे। पार्वती जी ने सिर्फ दो चावल के दाने दिए और गणेश जी तृप्त हो गए। इससे सीख मिलती है—दिखावा कभी काम नहीं आता, बल्कि सच्ची विनम्रता ही इंसान को तृप्त कर सकती है।"


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