पाँचवाँ दिन – धैर्य

पाँचवाँ दिन – धैर्य "एक बार गणेश जी ने खूब लड्डू खाए और मूषक पर बैठकर लौट रहे थे। अचानक वे गिर पड़े। चंद्रमा हँसने लगे। गणेश जी ने शाप दिया—‘आज के दिन जो भी तुम्हें देखेगा, उसे कलंक लगेगा।’ तभी से भाद्रपद चतुर्थी को चाँद देखने की मनाही है। इसका संदेश है—हमें कभी किसी की कमजोरी या कठिनाई पर हँसना नहीं चाहिए, क्योंकि मज़ाक उड़ाना ही सबसे बड़ा पापप है

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