सावन का चौथा सोमवार
आज सावन का चौथा सोमवार है...
और मैं आत्मा...
जीवन को ऊँचा बनाने के लिए
सजग पुरुषार्थ कर रही हूँ।
इस शरीर रूपी कॉस्टयूम में रहते हुए...
मेरी हर सोच,
हर बोल,
और हर कर्म —
मेरा पुरुषार्थ है..
यह मेरा भविष्य रचता है।
इसलिए हर क्षण,
मैं सजग हूँ...
जागरूक हूँ...
और श्रेष्ठ संकल्पों की राह पर चलती हुई...
पुरुषार्थी यात्री हूँ।
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