“हे मेरे शिव!
तीसरे सोमवार के इस पावन अवसर पर,
मैं अपने तन, मन और आत्मा की हर अशुद्धता —
आपके चरणों में समर्पित करती हूं।
जैसे आंवला तन को शुद्ध करता है,
वैसे ही मैं हर विचार, हर भावना को
निर्मल और पावन बनाऊं —
ताकि मेरे मन में ईश्वर सहज रूप से वास कर सके।
🌿 जब तक जीवन है,
मेरा तन-मन स्वस्थ रहे,
और मैं अपने सभी रिश्तों में
सच्चाई और पवित्रता बनाए रखूं।”
🪞 "मैं हर दिन अपने मन को दर्पण बनाऊंगी,
जिसमें केवल ईश्वर की झलक हो —
और कोई भी विकार उसमें टिक न सके।"
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