obstacles on the way

हम जीवन के रास्ते पर आगे बढ़ रहे होते हैं...
अचानक — एक पत्थर रास्ते में आ जाता है।
रुकते हैं, चौंकते हैं, कभी गिर भी जाते हैं।
पर वो पत्थर हमारे रास्ते में 
रोकने नहीं आया होता।
वो रास्ते में रखा हुआ है।

अब हमें निर्णय लेना है —
कि क्या हम उस पत्थर से टकराकर गिर जाएं,
या उसकी बगल से होकर शांति से निकल जाएं...
या फिर — उस पर पाँव रखकर,
एक और ऊँचाई की ओर बढ़ जाएं।

मतलब पत्थर आया विध्न आए, बाधा आई 
और हमे मोड़ लेना है।
पत्थर रूपी विध्नों को पार करके
हम शांति से निकल जाएं

और वह पत्थर...?
वह अब हमारे सफ़र का हिस्सा नहीं,
हमारी कहानी का मोड़ बन जाता है —
जहाँ से हम बदलते हैं,
निखरते हैं।

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