🌿 हरियाली अमावस्या –पाँच पौधे और एक अनमोल सीख

हरियाली अमावस्या केवल धरती की हरियाली का उत्सव नहीं है, यह हमारे मन और जीवन को भी हरा-भरा करने का अवसर है।

इस पावन दिन पर मैंने अपने हाथों से पाँच पौधे लगाए – 🌳 पीपल, 🌿 बरगद, 🍏 अमरूद, 🍇 जामुन और 🍋 आंवला।

पर ये पौधे सिर्फ हरियाली नहीं लाए… इन्होंने मुझे जीवन का एक गहरा पाठ भी सिखाया।

🌱 मैंने बीज और कलम लाकर इन्हें लगाया। हर एक स्टेप – मिट्टी तैयार करना, बीज बोना, पानी देना – जैसे कोई आध्यात्मिक प्रक्रिया थी।

इस दौरान मैंने महसूस किया कि…

“जैसे एक बीज को पेड़ बनने में समय लगता है, वैसे ही जीवन में भी हर अच्छे परिणाम के लिए धैर्य रखना जरूरी है।”

यह प्रक्रिया मेरे लिए एक ध्यान की तरह थी। मैंने हर पौधे के साथ प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा भी बोई।

“मैं केवल अपने आंगन में ही नहीं, अपने मन में भी हरियाली लाऊँगी। मैं पुराने दुःख, क्रोध और नकारात्मक विचारों को छोड़कर प्रेम, करुणा और शांति का स्वागत करूंगी।”

हरियाली अमावस्या वह पावन दिन है, जब प्रकृति हमें सिखाती है कि “अंधकार कितना भी गहरा हो, बारिश के बाद हरियाली लौट ही आती है।”

इस दिन मैं भी अपनी जीवन-यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ने का संकल्प लेती हूं। मैंने अपने हाथों से पाँच पवित्र पौधे लगाए:

पीपल रात और दिन दोनों समय ऑक्सीजन छोड़ता है। जो शांति और लंबी उम्र का संदेश देता है। 

बरगद पेड़ सैकड़ो साल तक जीवित रहता है। यह हमे जीवन में स्थिरता और धैर्य रखने की प्रेरणा देता है

अमरूद का फल विटामिन सी और फाइबर से भरपूर होता है।

जामुन का पेड़ औषधीय गुणों का खजाना, डायबिटीज में अमृत समान है। यह शुगर कंट्रोल में मदद करता है।

आंवला आयुर्वेद का अमृत, विटामिन सी का सबसे बड़ा स्रोत है

संकल्प:

“जैसे धरती पर बारिश हरियाली भर देती है, वैसे ही मैं अपने भीतर के पुराने दुःख, क्रोध और नकारात्मक विचारों को धो दूंगी… और प्रेम, करुणा, आनंद और आत्मिक शांति का बीज बोऊंगी।”

🌸 - अंजना सक्सेना (श्रीवास्तव) 


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