कहानी: "कमल का फूल"

कहानी: "कमल का फूल"

एक सुंदर झील थी, जिसमें कीचड़ भरा हुआ था। उसी झील में एक कमल का फूल खिला था। लोग दूर-दूर से उस कमल को देखने आते थे, क्योंकि वह अद्भुत रूप से चमकता था — उजला, स्वच्छ और सुंदर।

एक दिन एक बच्चे ने कमल से पूछा, "कमल भाई, तुम इस गंदे कीचड़ में रहते हो, फिर भी तुम्हारे ऊपर एक भी धब्बा नहीं लगता! तुम हमेशा इतने सुंदर कैसे रहते हो?"

कमल ने मुस्कुराकर उत्तर दिया, "बेटा, मैं जानता हूँ कि मैं कहां हूं। मुझे इस कीचड़ से डर नहीं है, न ही मैं इसे बदलने की कोशिश करता हूं। मैं बस सूरज की ओर अपना मुख खोले रखता हूं और हर क्षण प्रकाश को अपने भीतर भरता हूं। मैं जानता हूं कि मेरा असली स्वभाव प्रकाश, सुंदरता और शांति है — न कि कीचड़। इसीलिए कीचड़ मुझे छू नहीं पाता।"

बच्चा चकित रह गया और उसने समझ लिया कि सच्ची सुंदरता बाहर की परिस्थितियों से नहीं, भीतर की शुद्धता से आती है।

गुरु ने अपने शिष्यों से कहा,
"जीवन में रहकर जीवन मुक्त वही होता है जो अपने चारों ओर के दुख, संघर्ष और समस्याओं के बीच भी अपनी आत्मा की शुद्धता और आनंद को बचाकर रखे। जैसे कमल कीचड़ में खिलता है पर उससे प्रभावित नहीं होता, वैसे ही हमें भी संसार में रहते हुए, संसार से ऊपर उठकर जीना है।"

सीख:
"संसार के बीच रहकर भी जब आत्मा अपनी शांति, पवित्रता और आनंद को न छोड़े — वही सच्ची जीवन मुक्ति है।"

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