जहां लोग गिरे, वहां सीख छुपी है -

हम हमेशा सफल लोगों के पास बैठते हैं या उनकी बातें करते हैं। जब भी हम दोस्तों के बीच, समाज में या रिश्तेदारों के साथ होते हैं, तो स्वाभाविक तौर पर हम सफल लोगों के बारे में ही बात करते हैं।

कभी हम अपने बच्चों से बात कर रहे होते हैं, उन्हें कोई सीख दे रहे होते हैं, तो भी हम सफल लोगों के उदाहरण देते हैं।

क्यों? क्योंकि सफल लोगों की कहानी सुनाना आसान लगता है। हम कहते हैं – “देखो उसने कितनी ऊँचाइयाँ पाई, तुम भी ऐसा करो।”
लेकिन हम यह नहीं बताते कि उस सफलता के पीछे कितनी मेहनत, कितने संघर्ष और कितने आँसू छुपे हुए हैं। हम यह भी नहीं जानते कि वे कितनी बार गिरे और फिर उठ खड़े हुए। बोलना आसान है… और दूसरों को उपदेश देना तो और भी आसान।

लेकिन क्या हमने कभी असफल लोगों की बात की? नहीं।
हम अक्सर कहते हैं – “वह क्या सिखाएगा? उसका तो कुछ हुआ ही नहीं।”
हम यह सोचते हैं कि असफल लोग हमारे लिए प्रेरणा नहीं बन सकते।

लेकिन दोस्तों, असफल लोगों के साथ भी बैठिए।
क्योंकि हर असफलता के पीछे एक कहानी होती है। वह व्यक्ति असफल इसीलिए हुआ क्योंकि उसने कुछ करने की हिम्मत की। उसका संघर्ष, उसकी यात्रा, उसके अनुभव – ये सब आपको वो सिखा सकते हैं, जो शायद सफल लोग भी ना सिखा पाएं।
वह बता सकता है कि किस मोड़ पर वह फिसला, कहां गलत निर्णय लिया, किन परिस्थितियों ने उसे रोका।
उसकी बातें आपको बचा सकती हैं, आपको मजबूत बना सकती हैं।

याद रखिए –
सफलता आपको दिशा देती है, लेकिन असफलता आपको गहराई देती है।
इसलिए दोनों के पास बैठिए, दोनों की सुनिए। तभी आपकी अपनी यात्रा संपूर्ण होगी।


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